छत्तीसगढ़ में बिजली दरें टलीं, उपभोक्ताओं को राहत, बढ़ोतरी तय
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छत्तीसगढ़ में नया बिजली टैरिफ लागू न होने से उपभोक्ताओं को अप्रैल और मई में पुराने रेट पर बिजली मिल रही है, जिससे अस्थायी राहत बनी हुई है।
पॉवर कंपनी ने 6300 करोड़ रुपये के घाटे का हवाला देते हुए बिजली दरों में बढ़ोतरी की मांग की है, जिस पर आयोग अभी विचार कर रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि आयोग घाटे को मंजूरी देता है तो बिजली दरों में 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ेगा।
Raipur/ छत्तीसगढ़ में बढ़ती बिजली दरों को लेकर उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिली है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित नया बिजली टैरिफ अभी तक लागू नहीं हो पाया है, जिससे अप्रैल और मई में लोगों को पुराने रेट पर ही बिजली मिल रही है। हालांकि यह राहत अस्थायी मानी जा रही है, क्योंकि राज्य पॉवर कंपनी के भारी घाटे और नियामक आयोग के लंबित फैसले के चलते आने वाले समय में बिजली दरों में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।
छत्तीसगढ़ में बिजली उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत जरूर मिली है, लेकिन यह राहत लंबे समय तक टिकने वाली नहीं दिख रही। राज्य की पॉवर कंपनी द्वारा प्रस्तावित नए टैरिफ पर अभी तक अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है, जिसके कारण अप्रैल से लागू होने वाली नई दरें मई तक टल गई हैं।
जानकारी के अनुसार, पॉवर कंपनी ने बिजली दरों में संशोधन के लिए याचिका दायर की थी, जिस पर नियामक आयोग पिछले ढाई महीने से विचार कर रहा है। कंपनी ने करीब 6300 करोड़ रुपये के घाटे का हवाला देते हुए टैरिफ बढ़ाने की मांग की है, जिससे मामला जटिल हो गया है।
आंकड़ों के मुताबिक, मौजूदा दरों के आधार पर कंपनी को लगभग 26,216 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने की उम्मीद है, जबकि खर्च 25,460 करोड़ रुपये के आसपास बताया गया है। इससे करीब 756 करोड़ रुपये का लाभ बनता है। लेकिन कंपनी ने पिछले वर्षों के घाटे को जोड़ते हुए कुल राजस्व आवश्यकता 32,500 करोड़ रुपये से अधिक बताई है।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि यदि नियामक आयोग कंपनी के घाटे का बड़ा हिस्सा स्वीकार कर लेता है, तो बिजली दरों में 15 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है। पिछले वर्ष भी सीमित घाटे को मंजूरी मिलने पर दरों में वृद्धि देखी गई थी।
फरवरी में जनसुनवाई पूरी होने के बाद से आयोग लगातार आंकड़ों की समीक्षा कर रहा है, लेकिन अब तक कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है। यही वजह है कि उपभोक्ताओं को फिलहाल पुराने टैरिफ का लाभ मिल रहा है।
हालांकि संकेत साफ हैं कि यह राहत अस्थायी है। जैसे ही आयोग अंतिम निर्णय लेगा, बिजली दरों में बढ़ोतरी लागू हो सकती है। ऐसे में आने वाले महीनों में उपभोक्ताओं को महंगाई का अतिरिक्त बोझ झेलना पड़ सकता है।